शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरूघटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:11 बजे तक (नई दिल्ली)19 अक्टूबर को संधि पूजा: सुबह 10:28 से 11:16 बजे तकविजयादशमी (दशहरा) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को

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तिथियाँ और पंचांग

नवरात्रि 2026 की तिथियाँ: कैलेंडर और रोज़ का पंचांग

महालया 10 अक्टूबर से दशमी 21 अक्टूबर 2026 तक, नई दिल्ली के लिए रोज़ की तिथि, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और राहु काल।

नदी के ऊपर उगता सूरज, पास में मेज़ वाला कैलेंडर, पीतल का लोटा और सामने गेंदे के फूल

रोज़ का पंचांग

समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय (IST) में निकाला गया है। तिथि शुरू और खत्म होने का पल पूरे भारत में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलते हैं। दूसरे पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।

नवरात्रि 2026 पंचांग, नई दिल्ली
तारीख / देवीतिथिसूर्योदयसूर्यास्तचंद्रोदयराहु काल
शनिवार, 10 अक्टूबरमहालयाअमावस्या (रात 9:20 तक), फिर प्रतिपदासुबह 6:18शाम 5:57सुबह 5:49सुबह 9:13 – सुबह 10:40
रविवार, 11 अक्टूबरमाँ शैलपुत्रीप्रतिपदा (रात 9:31 तक), फिर द्वितीयासुबह 6:19शाम 5:56सुबह 6:47शाम 4:28 – शाम 5:56
सोमवार, 12 अक्टूबरमाँ ब्रह्मचारिणीद्वितीया (रात 10:13 तक), फिर तृतीयासुबह 6:20शाम 5:54सुबह 7:46सुबह 7:46 – सुबह 9:13
मंगलवार, 13 अक्टूबरमाँ चंद्रघंटातृतीया (रात 11:28 तक), फिर चतुर्थीसुबह 6:20शाम 5:53सुबह 8:46दोपहर 3:00 – शाम 4:27
बुधवार, 14 अक्टूबरमाँ कूष्मांडाचतुर्थीसुबह 6:21शाम 5:52सुबह 9:44दोपहर 12:07 – दोपहर 1:33
गुरुवार, 15 अक्टूबरमाँ स्कंदमातापंचमीसुबह 6:21शाम 5:51सुबह 10:41दोपहर 1:33 – दोपहर 2:59
शुक्रवार, 16 अक्टूबरमाँ कात्यायनीषष्ठीसुबह 6:22शाम 5:50सुबह 11:34सुबह 10:40 – दोपहर 12:06
शनिवार, 17 अक्टूबरमाँ कालरात्रिसप्तमीसुबह 6:23शाम 5:49दोपहर 12:22सुबह 9:14 – सुबह 10:40
रविवार, 18 अक्टूबरमाँ महागौरीसप्तमी (सुबह 8:28 तक), फिर अष्टमीसुबह 6:23शाम 5:48दोपहर 1:05शाम 4:23 – शाम 5:48
सोमवार, 19 अक्टूबरमाँ सिद्धिदात्रीअष्टमी (सुबह 10:52 तक), फिर नवमीसुबह 6:24शाम 5:47दोपहर 1:44सुबह 7:49 – सुबह 9:15
मंगलवार, 20 अक्टूबरविजयादशमीनवमी (दोपहर 12:50 तक), फिर दशमीसुबह 6:24शाम 5:46दोपहर 2:19दोपहर 2:56 – शाम 4:21
बुधवार, 21 अक्टूबरबिजोया दशमी (बंगाल)दशमी (दोपहर 2:12 तक), फिर एकादशीसुबह 6:25शाम 5:45दोपहर 2:50दोपहर 12:05 – दोपहर 1:30

ज़रूरी मुहूर्त

मुहूर्ततारीखसमय (नई दिल्ली)
घटस्थापना मुहूर्तरविवार, 11 अक्टूबरसुबह 6:19 – सुबह 10:11
अभिजीत मुहूर्त (घटस्थापना)रविवार, 11 अक्टूबरसुबह 11:44 – दोपहर 12:30
संधि पूजासोमवार, 19 अक्टूबरसुबह 10:28 – सुबह 11:16
विजय मुहूर्तमंगलवार, 20 अक्टूबरदोपहर 1:59 – दोपहर 2:44
अपराह्न पूजा का समयमंगलवार, 20 अक्टूबरदोपहर 1:13 – दोपहर 3:30

तिथि के शुरू और खत्म होने का समय

ये पल पूरे भारत में एक ही होते हैं (IST)।

तिथिशुरूसमाप्त
अमावस्याशुक्रवार, 9 अक्टूबर, रात 9:36शनिवार, 10 अक्टूबर, रात 9:20
प्रतिपदाशनिवार, 10 अक्टूबर, रात 9:20रविवार, 11 अक्टूबर, रात 9:31
द्वितीयारविवार, 11 अक्टूबर, रात 9:31सोमवार, 12 अक्टूबर, रात 10:13
तृतीयासोमवार, 12 अक्टूबर, रात 10:13मंगलवार, 13 अक्टूबर, रात 11:28
चतुर्थीमंगलवार, 13 अक्टूबर, रात 11:28गुरुवार, 15 अक्टूबर, रात 1:13
पंचमीगुरुवार, 15 अक्टूबर, रात 1:13शुक्रवार, 16 अक्टूबर, रात 3:25
षष्ठीशुक्रवार, 16 अक्टूबर, रात 3:25शनिवार, 17 अक्टूबर, सुबह 5:54
सप्तमीशनिवार, 17 अक्टूबर, सुबह 5:54रविवार, 18 अक्टूबर, सुबह 8:28
अष्टमीरविवार, 18 अक्टूबर, सुबह 8:28सोमवार, 19 अक्टूबर, सुबह 10:52
नवमीसोमवार, 19 अक्टूबर, सुबह 10:52मंगलवार, 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50
दशमीमंगलवार, 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50बुधवार, 21 अक्टूबर, दोपहर 2:12

यह पंचांग कैसे पढ़ें

तिथि चंद्र दिवस है। आम तौर पर पर्व उस दिन मनाया जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय उसकी तिथि हो, इसलिए "सूर्योदय पर तिथि" वाले कॉलम से ही नवरात्रि का हर दिन तय होता है।

सूर्योदय

हिंदू पंचांग में दिन आधी रात से आधी रात तक नहीं, बल्कि एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। पंचांग में सूर्योदय के समय चल रही तिथि को ही पूरे दिन की तिथि माना जाता है, इसलिए सूर्योदय का समय यह तय कर सकता है कि कोई त्योहार या व्रत किस तारीख को मनाया जाएगा।

कई मुहूर्त भी सूर्योदय से ही गिने जाते हैं, जैसे दिन के पहले हिस्से में पड़ने वाला सुबह का मुहूर्त। हर शहर में सूर्योदय अलग समय पर होता है, और साल भर में थोड़ा आगे-पीछे भी होता है, इसलिए पंचांग का समय हमेशा किसी खास जगह के स्थानीय सूर्योदय से निकाला जाता है।

नदी के ऊपर उगता सूरज, किनारे पर मंदिर और उसकी सीढ़ियाँ

नवरात्रि 2026 में (नई दिल्ली): ऊपर सूर्योदय वाले कॉलम में हर दिन का समय है। 11 अक्टूबर, घटस्थापना के दिन, सूर्योदय सुबह 6:19 है, और घटस्थापना मुहूर्त इसी से गिना जाता है।

राहु काल

राहु काल हर दिन आने वाला लगभग डेढ़ घंटे का समय है। हिंदू पंचांग की परंपरा में इसे राहु से जोड़ा जाता है, और पारंपरिक रूप से इसे कोई ज़रूरी या शुभ काम शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, जैसे पूजा, बड़ी खरीदारी या यात्रा। कुछ परिवार इसका पूरा ध्यान रखते हैं, जबकि कुछ इसे नहीं मानते। जो काम पहले से चल रहा हो, उसे आम तौर पर रोका नहीं जाता।

इसे निकालने के लिए स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और हर वार के लिए तय एक भाग राहु काल माना जाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त रोज़ और हर जगह बदलते हैं, इसलिए राहु काल का समय भी बदलता रहता है।

लाल कपड़े पर रखी पंचांग की पुरानी पोथी, पीतल की अलार्म घड़ी, जलता दीया और गेंदे के फूल

नवरात्रि 2026 में (नई दिल्ली): राहु काल वाले कॉलम में हर दिन का निकाला गया समय है। 11 अक्टूबर को यह शाम 4:28 – शाम 5:56 है, जो सुबह के घटस्थापना मुहूर्त से काफ़ी बाद है।

चंद्रोदय

चंद्रोदय वह समय है जब किसी जगह पर चाँद पूर्व दिशा में क्षितिज के ऊपर आता है। कई हिंदू व्रत चाँद देखने के बाद ही पूरे होते हैं। जैसे करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी पर चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है, इसलिए उन दिनों स्थानीय चंद्रोदय का समय सबसे ज़्यादा देखा जाता है।

औसतन चाँद हर दिन लगभग 50 मिनट देर से निकलता है, और सही समय इस पर भी निर्भर करता है कि आप कहाँ हैं। इसीलिए चंद्रोदय का समय उसी तारीख और शहर के लिए देखना चाहिए, किसी दूसरे दिन या जगह से नहीं।

बादलों और नदी के ऊपर पूरा चाँद, दूसरे किनारे पर रोशनी से जगमगाता मंदिर

नवरात्रि 2026 में (नई दिल्ली): नवरात्रि शुक्ल पक्ष में आती है, इसलिए चाँद हर दिन आधे घंटे से एक घंटे तक देर से निकलता है: 11 अक्टूबर को सुबह 6:47 और विजयादशमी, 20 अक्टूबर को दोपहर 2:19। नवरात्रि की मुख्य पूजाओं का समय चंद्रोदय से तय नहीं होता, इसलिए चंद्रोदय वाला कॉलम जानकारी के लिए दिया गया है।

2026 में सप्तमी तिथि दो सूर्योदयों (17 और 18 अक्टूबर) पर है। इसे तिथि वृद्धि कहते हैं। इसी कारण ज़्यादातर उत्तर भारतीय पंचांगों में दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं, और संधि पूजा उसी दिन देर सुबह होती है।

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