- नवरात्रि का दिन
- दिन 4
- 2026 में तारीख
- बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
- रंग
- रॉयल ब्लू
- वाहन
- सिंह
- प्रसाद / भोग
- मालपुआ
- सूर्योदय पर तिथि
- चतुर्थी
माँ कूष्मांडा के बारे में
कथाओं के अनुसार जब चारों ओर केवल अंधकार था, तब माँ कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। उनके नाम का अर्थ अक्सर "कु" (थोड़ा), "ऊष्मा" (गर्मी) और "अंड" (ब्रह्मांड) से समझाया जाता है।
उनकी आठ भुजाएँ हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा भी कहते हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला होती है, और वे सिंह पर सवार रहती हैं। माना जाता है कि वे सूर्य के भीतर निवास करती हैं।
पूजा विधि
- सुबह की प्रार्थना के बाद माँ कूष्मांडा को फूल, कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
- भोग में मालपुआ चढ़ाएँ। कई परिवार यह मालपुआ प्रसाद के रूप में पड़ोसियों या मंदिर में बाँटते हैं।
- घी का दीया जलाएँ और उनका मंत्र जपें।
- आरती करें और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
मंत्र
मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
ध्यान मंत्र
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
पूजा शुरू करने से पहले देवी का ध्यान करते हुए इसका पाठ करें।
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आरती
आरती: ॐ जय अम्बे गौरी
यह माँ दुर्गा (अम्बे माँ) की आरती है, जो नवरात्रि की हर शाम गाई जाती है, चाहे उस दिन कोई भी स्वरूप पूजा जाए। जैसा आखिरी पद में लिखा है, इसकी रचना शिवानंद स्वामी की मानी जाती है।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥
महत्व
माँ कूष्मांडा का संबंध प्रकाश, ऊर्जा और स्वास्थ्य से है। भक्त उनसे अच्छी सेहत और साफ़ मन की प्रार्थना करते हैं। उनकी पूजा अनाहत (हृदय) चक्र से जुड़ी मानी जाती है।
2026 में दिन 4: तिथि और समय
चौथा दिन चतुर्थी तिथि को है।
| तारीख | सूर्योदय पर तिथि | सूर्योदय | सूर्यास्त | चंद्रोदय | राहु काल |
|---|---|---|---|---|---|
| मंगलवार, 13 अक्टूबर | तृतीया (रात 11:28 तक), फिर चतुर्थी | सुबह 6:20 | शाम 5:53 | सुबह 8:46 | दोपहर 3:00 – शाम 4:27 |
| बुधवार, 14 अक्टूबर | चतुर्थी | सुबह 6:21 | शाम 5:52 | सुबह 9:44 | दोपहर 12:07 – दोपहर 1:33 |
| गुरुवार, 15 अक्टूबर | पंचमी | सुबह 6:21 | शाम 5:51 | सुबह 10:41 | दोपहर 1:33 – दोपहर 2:59 |
इस दिन राहु काल दोपहर के आसपास पड़ता है, इसलिए सुबह जल्दी की पूजा पर इसका असर नहीं पड़ता। सूर्योदय, चंद्रोदय और राहु काल का अर्थ
समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय (IST) में निकाला गया है। तिथि शुरू और खत्म होने का पल पूरे भारत में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलते हैं। दूसरे पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।
