शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरूघटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:11 बजे तक (नई दिल्ली)19 अक्टूबर को संधि पूजा: सुबह 10:28 से 11:16 बजे तकविजयादशमी (दशहरा) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को

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विजयादशमी 2026

विजयादशमी (दशहरा) 2026: तारीख, विजय मुहूर्त और पूजा का समय

विजयादशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है। यहाँ जानें इस दिन का अर्थ, नई दिल्ली का मुहूर्त और इसे कैसे मनाते हैं।

सूर्यास्त के समय दस सिर वाले रावण के विशाल पुतले की ओर धनुष ताने भगवान राम, साथ में लक्ष्मण और सीता, सामने दीये और गेंदे के फूल

विजयादशमी का अर्थ

विजयादशमी का अर्थ है "विजय की दशमी"। यह नवरात्रि की नौ रातों के ठीक बाद, आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आती है। उत्तर भारत में इसे दशहरा कहते हैं, जो "दश-हरा" यानी दस सिर वाले रावण की हार से बना है।

दशहरा क्यों मनाया जाता है

इस दिन दो विजयों को याद किया जाता है। रामायण में भगवान राम ने लंका में रावण का वध करके सीता को मुक्त कराया। देवी माहात्म्य में माँ दुर्गा ने नौ दिन के युद्ध के बाद महिषासुर का वध किया। दोनों का संदेश एक है: बुराई कितनी भी ताकतवर दिखे, जीत अच्छाई की होती है।

विजयादशमी 2026 मुहूर्त (नई दिल्ली)

तारीखमंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
दशमी तिथिदोपहर 12:50 (20 अक्टूबर) – दोपहर 2:12 (21 अक्टूबर)
विजय मुहूर्तदोपहर 1:59 – दोपहर 2:44
अपराह्न पूजा का समयदोपहर 1:13 – दोपहर 3:30
श्रवण नक्षत्रशाम लगभग 6:01 बजे तक
सूर्योदय / सूर्यास्तसुबह 6:24 / शाम 5:46
राहु कालदोपहर 2:56 – शाम 4:21

समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय (IST) में निकाला गया है। तिथि शुरू और खत्म होने का पल पूरे भारत में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलते हैं। दूसरे पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।

विजय मुहूर्त, जो दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त है, नया काम शुरू करने, कोई ज़रूरी चीज़ खरीदने या यात्रा पर निकलने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। अपराह्न काल अपराजिता पूजा और शमी पूजा का पारंपरिक समय है। राहु काल रोज़ आने वाला वह समय है जिसमें कई परिवार पूजा या नया काम शुरू नहीं करते। 20 अक्टूबर को यह दोपहर 2:56 से शुरू होता है, इसलिए अगर आप उससे बचना चाहें तो पूजा विजय मुहूर्त में ही पूरी कर लें।

कैसे मनाते हैं

  • रावण दहन: रामलीला खत्म होने के बाद सूर्यास्त के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले जलाए जाते हैं, अक्सर आतिशबाज़ी के साथ।
  • शमी और अपराजिता पूजा: दोपहर में शमी वृक्ष और देवी अपराजिता की पूजा होती है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में आपटा या शमी के पत्ते "सोने" के रूप में बाँटे जाते हैं।
  • शस्त्र पूजा: नवमी की आयुध पूजा की तरह अस्त्र-शस्त्र, औज़ार और वाहन पूजे जाते हैं।
  • विद्यारंभम: केरल और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में छोटे बच्चे इस दिन अपने पहले अक्षर लिखते हैं।
  • दुर्गा विसर्जन: घर के कलश और प्रतिमा को विदा किया जाता है। बंगाल में बिजोया दशमी और विसर्जन 21 अक्टूबर को हैं। दुर्गा पूजा देखें।
  • खेतरी: घटस्थापना से उगाए गए जौ के अंकुर चढ़ाकर बाँटे जाते हैं।
सूर्यास्त के समय दशहरा मैदान में भारी भीड़ के ऊपर खड़ा रावण का ऊँचा पुतला

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