शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरूघटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:11 बजे तक (नई दिल्ली)19 अक्टूबर को संधि पूजा: सुबह 10:28 से 11:16 बजे तकविजयादशमी (दशहरा) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को

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नवरात्रि दिन 5 · गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

माँ स्कंदमाता

स्कंद (कार्तिकेय) की माता, जिनकी पूजा पाँचवें दिन संतान और परिवार की खुशहाली के लिए होती है।

गोद में बाल स्कंद (कार्तिकेय) को लिए, ऊपरी हाथों में कमल, सिंह पर विराजमान माँ स्कंदमाता
नवरात्रि का दिन
दिन 5
2026 में तारीख
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026
रंग
पीला
वाहन
सिंह
प्रसाद / भोग
केला
सूर्योदय पर तिथि
पंचमी

माँ स्कंदमाता के बारे में

स्कंदमाता भगवान स्कंद की माता हैं, जिन्हें कार्तिकेय या मुरुगन भी कहते हैं। वे देवताओं के सेनापति थे और उन्होंने तारकासुर का वध किया था। माँ के चित्र में बाल स्कंद उनकी गोद में होते हैं।

उनकी चार भुजाएँ हैं। दो हाथों में कमल, एक में स्कंद और एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में होता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और अक्सर कमल पर विराजमान दिखती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना भी कहते हैं।

पूजा विधि

  1. सुबह की प्रार्थना के बाद पीले फूल, हल्दी-कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
  2. भोग में केला चढ़ाएँ। कुछ परिवार इसे ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को देते हैं।
  3. उनका मंत्र जपें और परिवार, खासकर बच्चों के लिए प्रार्थना करें।
  4. आरती से पूजा पूरी करें।

मंत्र

मंत्र

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

ध्यान मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

पूजा शुरू करने से पहले देवी का ध्यान करते हुए इसका पाठ करें।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आरती

आरती: ॐ जय अम्बे गौरी

यह माँ दुर्गा (अम्बे माँ) की आरती है, जो नवरात्रि की हर शाम गाई जाती है, चाहे उस दिन कोई भी स्वरूप पूजा जाए। जैसा आखिरी पद में लिखा है, इसकी रचना शिवानंद स्वामी की मानी जाती है।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥

महत्व

माँ स्कंदमाता देवी के ममतामयी और रक्षा करने वाले रूप को दिखाती हैं। माता-पिता उनसे अपने बच्चों की सेहत और उन्नति की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि उनकी पूजा से भगवान कार्तिकेय का आशीर्वाद भी साथ में मिलता है। उनकी पूजा विशुद्ध चक्र से जुड़ी मानी जाती है।

2026 में दिन 5: तिथि और समय

पाँचवाँ दिन पंचमी तिथि को है, जो 15 अक्टूबर को रात 1:13 बजे शुरू होती है।

नई दिल्ली का पंचांग (IST)
तारीखसूर्योदय पर तिथिसूर्योदयसूर्यास्तचंद्रोदयराहु काल
बुधवार, 14 अक्टूबरचतुर्थीसुबह 6:21शाम 5:52सुबह 9:44दोपहर 12:07 – दोपहर 1:33
गुरुवार, 15 अक्टूबरपंचमीसुबह 6:21शाम 5:51सुबह 10:41दोपहर 1:33 – दोपहर 2:59
शुक्रवार, 16 अक्टूबरषष्ठीसुबह 6:22शाम 5:50सुबह 11:34सुबह 10:40 – दोपहर 12:06

इस दिन राहु काल दोपहर के आसपास पड़ता है, इसलिए सुबह जल्दी की पूजा पर इसका असर नहीं पड़ता। सूर्योदय, चंद्रोदय और राहु काल का अर्थ

समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय (IST) में निकाला गया है। तिथि शुरू और खत्म होने का पल पूरे भारत में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलते हैं। दूसरे पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।

नवरात्रि का पूरा पंचांग

यह भी देखें

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