शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरूघटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:11 बजे तक (नई दिल्ली)19 अक्टूबर को संधि पूजा: सुबह 10:28 से 11:16 बजे तकविजयादशमी (दशहरा) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को

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नवरात्रि प्रसाद

नवरात्रि के नौ दिनों का प्रसाद और भोग

हर देवी को क्या चढ़ाएँ, घर पर बनने वाला व्रत का सादा प्रसाद, और कन्या पूजन का हलवा-पूरी-चना भोग।

नवरात्रि प्रसाद की पीतल की थाली: खीर की कटोरी, केले, नारियल, फल और गेंदे के फूल

हर देवी का भोग

देवी के हर रूप से एक सरल भोग जुड़ा है। किसी देवी पर टैप करके उनकी पूजा विधि देखें।

व्रत के दिनों का सादा प्रसाद

अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो जो प्रसाद चढ़ाते हैं वही आपका भोजन भी बन सकता है। ये अनाज, प्याज़ और लहसुन के बिना बनते हैं:

  • मखाने की खीर – भुने मखाने दूध में थोड़ी चीनी और इलायची के साथ पकाए जाते हैं।
  • साबूदाना खिचड़ी – भीगा साबूदाना, मूँगफली, आलू, हरी मिर्च और सेंधा नमक के साथ।
  • कुट्टू या सिंघाड़े की पूरी – कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी, आलू की सब्ज़ी के साथ।
  • फल और मेवे – केला, सेब, नारियल और कुछ खजूर रोज़ के भोग के लिए बढ़िया हैं।
  • पंचामृत – दूध, दही, घी, शहद और चीनी, जो अक्सर पूजा में चढ़ाया जाता है।

कन्या पूजन का भोग

अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन में आई कन्याओं को सूजी का हलवा, पूरी और काले चने परोसे जाते हैं। यही भोग माँ सिद्धिदात्री और महागौरी को भी चढ़ाया जाता है। इसे सुबह ताज़ा बनाएँ, थोड़ा पहले देवी को चढ़ाएँ, फिर किसी और के खाने से पहले कन्याओं को परोसें।

कुछ ज़रूरी बातें

  • प्रसाद सात्विक होता है: प्याज़, लहसुन, मांस, अंडा या शराब नहीं।
  • खुद चखने से पहले देवी को चढ़ाएँ।
  • बाँटें। पड़ोसियों, घर में मदद करने वालों और ज़रूरतमंदों को प्रसाद देना भी पूजा का हिस्सा है।

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