शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरूघटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:11 बजे तक (नई दिल्ली)19 अक्टूबर को संधि पूजा: सुबह 10:28 से 11:16 बजे तकविजयादशमी (दशहरा) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को

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नवरात्रि दिन 2 · सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

माँ ब्रह्मचारिणी

तपस्विनी रूप में माँ पार्वती, जिनकी पूजा दूसरे दिन धैर्य और संयम के लिए की जाती है।

लाल किनारी वाली सफ़ेद साड़ी में नंगे पाँव चलती माँ ब्रह्मचारिणी, हाथ में रुद्राक्ष माला और पीतल का कमंडल
नवरात्रि का दिन
दिन 2
2026 में तारीख
सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
रंग
सफ़ेद
वाहन
कोई वाहन नहीं, नंगे पाँव चलती हैं
प्रसाद / भोग
शक्कर और मिश्री
सूर्योदय पर तिथि
द्वितीया

माँ ब्रह्मचारिणी के बारे में

ब्रह्मचारिणी माँ पार्वती का वह रूप है जब उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। कथाओं के अनुसार उन्होंने वर्षों तक केवल फल और पत्ते खाए और बाद में पत्ते भी त्याग दिए, इसलिए उनका एक नाम अपर्णा भी है।

वे सफ़ेद वस्त्र पहने नंगे पाँव चलती हैं। उनके दाएँ हाथ में जप माला और बाएँ हाथ में कमंडल होता है। उनका कोई वाहन नहीं है, जो एक तपस्विनी के सादे जीवन से मेल खाता है।

पूजा विधि

  1. कलश के सामने छोटी प्रार्थना से शुरुआत करें और ज़रूरत हो तो खेतरी में पानी दें।
  2. माँ ब्रह्मचारिणी को सफ़ेद फूल, चंदन और अक्षत चढ़ाएँ।
  3. भोग में शक्कर या मिश्री चढ़ाएँ। कुछ परिवार पंचामृत भी चढ़ाते हैं।
  4. रुद्राक्ष या तुलसी की माला पर उनका मंत्र जपें और आरती से पूजा पूरी करें।

मंत्र

मंत्र

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

ध्यान मंत्र

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

पूजा शुरू करने से पहले देवी का ध्यान करते हुए इसका पाठ करें।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आरती

आरती: ॐ जय अम्बे गौरी

यह माँ दुर्गा (अम्बे माँ) की आरती है, जो नवरात्रि की हर शाम गाई जाती है, चाहे उस दिन कोई भी स्वरूप पूजा जाए। जैसा आखिरी पद में लिखा है, इसकी रचना शिवानंद स्वामी की मानी जाती है।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥

महत्व

उनका रूप याद दिलाता है कि लगातार मेहनत से ही फल मिलता है। भक्त उनसे धैर्य, एकाग्रता और अपने व्रत निभाने की शक्ति माँगते हैं, जो नवरात्रि का व्रत रखने वालों के लिए खास मायने रखता है।

2026 में दिन 2: तिथि और समय

दूसरा दिन द्वितीया तिथि को है।

नई दिल्ली का पंचांग (IST)
तारीखसूर्योदय पर तिथिसूर्योदयसूर्यास्तचंद्रोदयराहु काल
रविवार, 11 अक्टूबरप्रतिपदा (रात 9:31 तक), फिर द्वितीयासुबह 6:19शाम 5:56सुबह 6:47शाम 4:28 – शाम 5:56
सोमवार, 12 अक्टूबरद्वितीया (रात 10:13 तक), फिर तृतीयासुबह 6:20शाम 5:54सुबह 7:46सुबह 7:46 – सुबह 9:13
मंगलवार, 13 अक्टूबरतृतीया (रात 11:28 तक), फिर चतुर्थीसुबह 6:20शाम 5:53सुबह 8:46दोपहर 3:00 – शाम 4:27

इस दिन राहु काल सुबह, सूर्योदय के कुछ देर बाद पड़ता है। जो परिवार इसका ध्यान रखते हैं, वे सुबह की पूजा इसके शुरू होने से पहले पूरी कर लेते हैं या इसके खत्म होने के बाद शुरू करते हैं। सूर्योदय, चंद्रोदय और राहु काल का अर्थ

समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय (IST) में निकाला गया है। तिथि शुरू और खत्म होने का पल पूरे भारत में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलते हैं। दूसरे पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।

नवरात्रि का पूरा पंचांग

यह भी देखें

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