उत्सव
गरबा और डांडिया रास: नवरात्रि की रातें 2026
ये नृत्य कहाँ से आए, कैसे खेले जाते हैं, और 11 से 19 अक्टूबर 2026 की नौ रातों के लिए कुछ काम के सुझाव।


गरबा
यह शब्द गर्भ से आया है, और छेद वाला मिट्टी का दीपक, गरबो, उसके भीतर जीवन की ज्योति का प्रतीक है। परंपरा से महिलाएँ गरबो या देवी की प्रतिमा के चारों ओर घेरे में ताली बजाते और घूमते हुए नाचती हैं। दो-ताली, तीन-ताली और तेज़ हींच जैसे कदम लोकप्रिय हैं। नवरात्रि की हर रात शाम की आरती के बाद गरबा होता है।

डांडिया रास
डांडिया सजी हुई लकड़ी की दो डंडियों से खेला जाता है और माना जाता है कि यह माँ दुर्गा और महिषासुर के युद्ध को दिखाता है, डंडियाँ उनकी तलवार का प्रतीक हैं। लोग दो कतारें या घेरे बनाते हैं, सामने वाले साथी से डंडी टकराते हैं, फिर अगले साथी की ओर बढ़ते हैं। संगीत आम तौर पर धीमा शुरू होता है और रात के साथ तेज़ होता जाता है। डांडिया अक्सर गरबा के बाद देर शाम होता है।

नवरात्रि की रंगोली
दरवाज़े पर या कलश के पास बनी रंगोली देवी का स्वागत करती है। कई परिवार पहले दिन नई रंगोली बनाते हैं और अष्टमी को उसे फिर से सजाते हैं। बीच में दीये वाले फूल और कमल के डिज़ाइन लोकप्रिय हैं, और मुख्य पंखुड़ियों के लिए उस दिन का रंग ले सकते हैं।
गरबा की रातों की तैयारी
ज़्यादातर गरबा और डांडिया कार्यक्रम नौ की नौ शामों को होते हैं। वीकेंड की रातें, रविवार 11 अक्टूबर और 17–18 अक्टूबर, आम तौर पर सबसे ज़्यादा भीड़ वाली होती हैं।
- आराम से नाचने लायक कपड़ेहल्के दुपट्टे के साथ चनिया चोली या केडियू पहनें, और जो चीज़ खिसक सकती है उसे पिन कर लें।
- पैरों का ध्यानमुलायम जूतियाँ या फ्लैट सैंडल पहनें। कई जगह बीच के गरबो के आसपास नंगे पाँव नाचते हैं।
- दिन के रंग से मेलउस दिन का नवरात्रि रंग पहनें, ग्रुप फ़ोटो अपने आप प्लान की हुई लगेंगी।
- पास और पानीमशहूर जगहों के पास जल्दी बिक जाते हैं। पानी साथ रखें, खासकर अगर व्रत है।