- नवरात्रि का दिन
- दिन 9
- 2026 में तारीख
- सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
- रंग
- मोरपंखी हरा
- वाहन
- सिंह, कमल पर विराजमान
- प्रसाद / भोग
- तिल, हलवा-पूरी-चना
- सूर्योदय पर तिथि
- अष्टमी
माँ सिद्धिदात्री के बारे में
सिद्धिदात्री का अर्थ है "सिद्धियाँ देने वाली"। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव को सभी सिद्धियाँ उन्हीं की कृपा से मिलीं और शिव का आधा शरीर देवी का हो गया, जिसे अर्धनारीश्वर रूप कहते हैं।
वे कमल पर विराजमान रहती हैं और सिंह पर भी सवार होती हैं। उनके चार हाथों में चक्र, शंख, गदा और कमल होते हैं। मनुष्य ही नहीं, देवता, ऋषि, सिद्ध और गंधर्व भी उनकी पूजा करते हैं।
पूजा विधि
- 2026 में आखिरी दिन दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा और नवमी की शुरुआत एक साथ है, इसलिए सुबह की पूजा जल्दी शुरू करें।
- संधि पूजा उन 48 मिनटों में होती है जब अष्टमी खत्म होकर नवमी शुरू होती है: 19 अक्टूबर को सुबह 10:28 से 11:16 बजे तक (IST)। परंपरा से 108 दीये और 108 कमल चढ़ाए जाते हैं।
- कन्या पूजन करें: नौ छोटी कन्याओं (और अक्सर एक बालक को लंगूर या भैरव के रूप में) को बुलाएँ, उनके पैर धोएँ और हलवा, पूरी, काले चने के साथ छोटा उपहार दें।
- माँ सिद्धिदात्री को तिल या हलवा-पूरी-चने का प्रसाद चढ़ाएँ, उनका मंत्र जपें, नवमी का हवन करें और आरती से पूजा पूरी करें। नई दिल्ली में हवन 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 से सूर्यास्त तक, या 20 अक्टूबर को सूर्योदय से दोपहर 12:50 तक, नवमी तिथि के रहते किया जा सकता है।
मंत्र
मंत्र
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
ध्यान मंत्र
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
पूजा शुरू करने से पहले देवी का ध्यान करते हुए इसका पाठ करें।
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आरती
आरती: ॐ जय अम्बे गौरी
यह माँ दुर्गा (अम्बे माँ) की आरती है, जो नवरात्रि की हर शाम गाई जाती है, चाहे उस दिन कोई भी स्वरूप पूजा जाए। जैसा आखिरी पद में लिखा है, इसकी रचना शिवानंद स्वामी की मानी जाती है।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥
महत्व
माँ सिद्धिदात्री नौ रातों की यात्रा को पूरा करती हैं। व्रत के संयम के बाद भक्त उनसे बुद्धि, काम में सफलता और मन की शांति माँगते हैं। उनकी पूजा वह क्षण है जब देवी पूरी नवरात्रि का फल देती हैं।
2026 में दिन 9: तिथि और समय
19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि है, जो सुबह 10:52 बजे खत्म होती है और फिर नवमी शुरू होती है। इसलिए उत्तर भारतीय पंचांगों में दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा, महानवमी और कन्या पूजन सब इसी दिन हैं। नवमी 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 बजे तक रहती है।
| तारीख | सूर्योदय पर तिथि | सूर्योदय | सूर्यास्त | चंद्रोदय | राहु काल |
|---|---|---|---|---|---|
| रविवार, 18 अक्टूबर | सप्तमी (सुबह 8:28 तक), फिर अष्टमी | सुबह 6:23 | शाम 5:48 | दोपहर 1:05 | शाम 4:23 – शाम 5:48 |
| सोमवार, 19 अक्टूबर | अष्टमी (सुबह 10:52 तक), फिर नवमी | सुबह 6:24 | शाम 5:47 | दोपहर 1:44 | सुबह 7:49 – सुबह 9:15 |
| मंगलवार, 20 अक्टूबर | नवमी (दोपहर 12:50 तक), फिर दशमी | सुबह 6:24 | शाम 5:46 | दोपहर 2:19 | दोपहर 2:56 – शाम 4:21 |
इस दिन राहु काल सुबह, सूर्योदय के कुछ देर बाद पड़ता है। जो परिवार इसका ध्यान रखते हैं, वे सुबह की पूजा इसके शुरू होने से पहले पूरी कर लेते हैं या इसके खत्म होने के बाद शुरू करते हैं, और यह संधि पूजा शुरू होने से पहले खत्म हो जाता है। सूर्योदय, चंद्रोदय और राहु काल का अर्थ
समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय (IST) में निकाला गया है। तिथि शुरू और खत्म होने का पल पूरे भारत में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलते हैं। दूसरे पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।
