शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरूघटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:11 बजे तक (नई दिल्ली)19 अक्टूबर को संधि पूजा: सुबह 10:28 से 11:16 बजे तकविजयादशमी (दशहरा) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को

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नवरात्रि दिन 3 · मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

माँ चंद्रघंटा

दस भुजाओं वाला स्वरूप, जिनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। इनकी पूजा साहस के लिए होती है।

लाल साड़ी में दस भुजाओं वाली माँ चंद्रघंटा, हाथों में त्रिशूल, तलवार और घंटा, बाघ पर विराजमान
नवरात्रि का दिन
दिन 3
2026 में तारीख
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
रंग
लाल
वाहन
बाघिन
प्रसाद / भोग
खीर और दूध की मिठाइयाँ
सूर्योदय पर तिथि
तृतीया

माँ चंद्रघंटा के बारे में

शिव से विवाह के बाद माँ पार्वती ने अपने माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण किया। इसी से उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।

उनकी दस भुजाएँ हैं, जिनमें त्रिशूल, तलवार, गदा और धनुष जैसे अस्त्र हैं, और वे बाघिन पर सवार रहती हैं। युद्ध के लिए तैयार होते हुए भी उनका चेहरा शांत रहता है। माना जाता है कि उनके घंटे की ध्वनि भय और नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है।

पूजा विधि

  1. कलश के सामने सुबह की प्रार्थना के बाद लाल फूल, कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
  2. भोग में खीर या दूध से बनी मिठाई चढ़ाएँ।
  3. पूजा के समय छोटी घंटी बजाएँ। यह उनके नाम को सम्मान देने का सरल तरीका है।
  4. उनका मंत्र जपें, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हों तो एक अध्याय पढ़ें और आरती करें।

मंत्र

मंत्र

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

ध्यान मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

पूजा शुरू करने से पहले देवी का ध्यान करते हुए इसका पाठ करें।

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आरती

आरती: ॐ जय अम्बे गौरी

यह माँ दुर्गा (अम्बे माँ) की आरती है, जो नवरात्रि की हर शाम गाई जाती है, चाहे उस दिन कोई भी स्वरूप पूजा जाए। जैसा आखिरी पद में लिखा है, इसकी रचना शिवानंद स्वामी की मानी जाती है।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै॥

महत्व

माँ चंद्रघंटा में कोमलता और वीरता दोनों हैं। भक्त उनसे साहस, मन की शांति और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। योग परंपरा में उनकी पूजा मणिपुर चक्र से जुड़ी मानी जाती है।

2026 में दिन 3: तिथि और समय

तीसरा दिन तृतीया तिथि को है।

नई दिल्ली का पंचांग (IST)
तारीखसूर्योदय पर तिथिसूर्योदयसूर्यास्तचंद्रोदयराहु काल
सोमवार, 12 अक्टूबरद्वितीया (रात 10:13 तक), फिर तृतीयासुबह 6:20शाम 5:54सुबह 7:46सुबह 7:46 – सुबह 9:13
मंगलवार, 13 अक्टूबरतृतीया (रात 11:28 तक), फिर चतुर्थीसुबह 6:20शाम 5:53सुबह 8:46दोपहर 3:00 – शाम 4:27
बुधवार, 14 अक्टूबरचतुर्थीसुबह 6:21शाम 5:52सुबह 9:44दोपहर 12:07 – दोपहर 1:33

इस दिन राहु काल दोपहर बाद पड़ता है, यानी सुबह की आम पूजा के काफ़ी बाद। सूर्योदय, चंद्रोदय और राहु काल का अर्थ

समय नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय (IST) में निकाला गया है। तिथि शुरू और खत्म होने का पल पूरे भारत में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलते हैं। दूसरे पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।

नवरात्रि का पूरा पंचांग

यह भी देखें

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